आप से पिछले दिनों काफी अरसे बाद मिलना हुआ । एक बार
जब राधा गोविन्द कालेज के मैदान में मैच हो रहा था तब और
बाद में जब अतुल जी की शोक सभा में प्रेस क्लब आना हुआ ।
बात करने का वही अंदाज । चाल में वही पुरानी
मस्ती । नाहक ही लोग कहते है की पुष्पेन्द्र जी बदल गए है । बोल में वही मिठास ।
जो किसी को भी अपना बना लेती है । हाँ ! तरक्की से जुडी कुछ मजबूरिया होती है
जिसका लोग अलग मतलब निकल लेते है । मिलना जुलना कम हो जाता है लेकिन यह तो
होता ही है । वह चाहे कोई भी हो । हम जब निर्मल जी से मिलते है तो जरूर चर्चा होती है ।
अब यही देखिये हम भी तो निर्मल जी से ज्यादा नहीं मिल पाते तो इसका मतलब तो यह नहीं की हम दूर हो
गए । हम लोगों में आज भी वही दो दसक पुरानी गर्मजोशी बनी है ।ईश्वर से
यही गुजारिश है कि हम लोगों में यही मोहब्बत बनी रहे और हम लोगों का साथ भी
बना रहे । क्यों हम ठीक कह रहे हैं न ।
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1 comment:
achha laga. mil na sako lekin apno ke bare men likhte jaroo raho.
................dinesh
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