May 1, 2011

जल ही जीवन है

पृथ्वी पर पहला जीव जल में ही उत्पन्न हुआ था। जल इस युग में अनमोल है। ऐसा नहीं है कि इसी युग में पानी की अत्यधिक महत्ता प्रतिपादित की गई है, वरन हर युग में पानी का अपना महत्व रहा है। तभी तो रहीम का यह पानीदार दोहा हर एक की जुबान पर आज तक जीवित है-रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।।हमारा देश कृषि प्रधान देश है जहाँ खास तौर से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका एवं अर्थव्यवस्था का एकमात्र साधन कृषि ही है। कृषि सिंचाई पर निर्भर करती है और सिंचाई का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत नदियाँ ही होती है। प्रदेश में नदियों का जाल जैसा बिछा हुआ है। समुद्री जल विश्व में उपलब्ध समस्त जल स्रोतों का 97 प्रतिशत है जो उपयोग योग्य नहीं है। उपयोग के लिए केवल 3 प्रतिशत जल ही उपलब्ध है जिसका विश्व की इतनी विशाल जनसंख्या इस्तेमाल करती है। संसार की सभी वस्तुओं में जल सर्वोत्तम है। ऐसी यूनानी मान्यता है। जल को इसीलिए जीवन का पर्याय माना गया है। उपयोग योग्य तीन प्रतिशत जल बढ़ती हुई जनसंख्या की प्यास बुझाने और अन्य उपयोग की आपूर्ति करने में पर्याप्त नहीं है।
आज सभी को जल बचाव के लिए जुट जाना चाहिए । क्योंकि बिना जल के जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती ।

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